महासमुंद - पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने कहा कि खरीफ सीजन 2025-26 में किसानों से धान खरीद पाने में भाजपा सरकार पूरी तरह असफल रहा। सरकार के लचर खरीदी व्यवस्था के चलते जिले के पंजीकृत किसान धान बेचने से वंचित होने के कगार पर पहुँच गए हैं। टोकन नहीं कटने, एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन की समस्या से जूझ रहे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए वर्तमान में भारी जद्दोजहद करना पड़ रहा है। 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान बेचने का समय शासन द्वारा निर्धारित की गई है। लेकिन, धान खरीदी के शुरूआती दिनों में सोसायटी कर्मचारियों के हड़ताल से खरीदी कार्य पूरे नवंबर माह तक प्रभावित रहा। जैसे-तैसे दिसंबर में खरीदी शुरू भी हुई तो पोर्टल की समस्या ने किसानों को परेशान किया। वहीं, एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता के चलते अनेक किसान पूरी तरह टूट गए। कभी तहसील दफ्तर के चक्कर तो कभी कलेक्टोरेट तथा सोसायटी के चक्कर काट-काटकर किसान इस कदर परेशान हुए कि जिले के बागबाहरा क्षेत्र के एक किसान ने गला काटकर आत्महत्या का प्रयास भी कर डाला। किसानों की इन समस्याओं पर सरकार ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की। किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि महासमुंद जिले में धान बेचने के लिए कुल 1 लाख 62 हजार किसान पंजीकृत हैं। इन किसानों से 12.45 लाख मीटि्रक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन, भाजपा सरकार के किसान विरोधी नीतियों, सोसायटियों में उत्पन्न कृत्रिम संकटों के चलते अभी भी आधे से अधिक किसान धान नहीं बेच पाएं हैं। दिसम्बर माह बीत चुका है। 2026 के जनवरी माह में 10 शासकीय अवकाश पड़ रहे हैं। केवल 21 दिन ही धान खरीदी का समय मिल पाएगा। ऐसे में पंजीकृत समस्त किसानों से धान की खरीदी कैसे होगी, यह चिंता का विषय है। अभी तक केवल 79 हजार 508 किसानों से कुल 4 लाख 81 हजार 843 मीटि्रक धान की खरीदी हो पाई है। जबकि, शेष 83 हजार 492 किसानों से 7 लाख 63 हजार 157 मीटि्रक टन धान खरीदना बाकी है। डेढ़ माह में सरकार आधे से भी कम किसानों से केवल लक्ष्य के 38 प्रतिशत धान ही खरीद पाई है। अब महज 21 दिन में 62 प्रतिशत धान की खरीदी कैसे हो पाएगी?
श्री चंद्राकर ने कहा कि सरकार जानबूझकर किसानों को धान बेचने से वंचित करने तरह-तरह के परेशानिया उत्पन्न कर रही है। अब सोसायटियों में बफर लिमिट पार होने के कारण धान रखने के लिए जगह की कमी हो रही है। ऐसे में सोसायटी में खरीदी बंद होने की नाैबत आ जाएगी। जिससे संबंधित सोसायटियों के किसान धान बेचने के लिए फिर उठाव होने का इंतजार करेंगे। वर्तमान में जिले के 182 उपार्जन केंद्रों में 3 लाख 76 हजार 12 मीटि्रक टन से अधिक धान जाम है। मिलरों को केवल 1 लाख 5 हजार 830 मीटि्रक टन धान ही जारी किया गया है। धान जाम होने से निश्चित ही खरीदी बंद होगी तथा किसान धान बेचने से वंचित होंगे।

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