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युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा भाजपा सरकार - विनोद चंद्राकर

महासमुंद - पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ मोदी की गारंटी पूरी तरह फेल हो चुकी है। सरकार के वादाखिलाफी के चलते प्रदेश के गरीब, मजदूर, किसान से लेकर शिक्षित बेरोजगार युवा निराश तथा आक्रोशित हैं। बेरोजगारों युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सरकार युवाओं के लिए नई भर्तियां नहीं निकाल पा रही है। साथ ही पहले से रिक्त पदों पर भी भर्ती को लेकर संवेदनशील नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार 2300 सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दे रही है। जिससे डीएड अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

श्री चंद्राकर ने कहा कि भाजपा ने मोदी की गारंटी के तहत छत्तीसगढ़ में सरकार बनने पर 100 दिन के भीतर 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था। इसके अलावा तत्कालीन शिक्षा मंत्री व वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने 33 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी। जिसमें व्याख्याता के 2524 पद, शिक्षक 8194 पद और सहायक शिक्षक के 22 हजार 341 पद शामिल हैं। श्री अग्रवाल के उक्त घोषणा पर साय सरकार ने अब तक कोई विचार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट का आदेश के बाद सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में 2621 बीएड डिग्री धारी शिक्षकों को हटाकर प्रयोगशाला में समायोजित किया गया था। इन रिक्त पदों पर डीएड/डीएलड अभ्यर्थियों को नियुक्ति देना था। लेकिन, कोर्ट के आदेश पर भी अब तक सरकार ने अमल करना उचित नहीं समझा। जो सरकार के मनमानी व तानाशाही को दर्शाता है।अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों द्वारा विगत 24 दिसंबर से धरना दिया जा रहा है। कड़ाके के ठंड में बेरोजगार युवा न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार की ओर से अब तक उनसे चर्चा के लिए ना ही कोई अधिकारी पहुंचा और ना ही सरकार के मंत्री। विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र में प्रदेश भर में 57000 शिक्षकों की भर्ती किए जाने का उल्लेख था। जिस पर प्रशिक्षित बेरोजगारों ने भरोसा किया था। लेकिन सरकार बनते ही भाजपा ने उनकी मांगों को दरकिनार कर दिया है। आज स्थिति यह है कि पिछले कई दिनों से अपनी मांगों लेकर अनशन में बैठे डी.एड/ डी. एल. एड अभ्यर्थियों के पास उनकी मांगों व समस्याओं को सुनने अभी तक सरकार की तरफ से कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं पहुंचा। बेरोजगार युवा आयु सीमा को लेकर चिंतित हैं। साल दर साल उम्र बढ़ने से वे पात्रता से बाहर हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ के युवा सरकार के तानाशाही रवैये से हताश व आक्रोशित हैं।

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