महासमुंद - पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि एग्रीस्टेक किसान पंजीयन की अनिवार्यता के बाद जिन किसानों ने पोर्टल में पंजीयन कराए हैं, वे किसान अब प्रशासनिक लापरवाही के चलते धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। ग्राम डुमरपाली के किसान रैनसिंग ध्रुव भाजपा शासन के प्रशासनिक विफलता का शिकार है। किसान ने अपनी ओर से धान बेचने के लिए जरूरी सभी नियमों का पालन किया। पोर्टल में कर्मचारियों की लापरवाही से हुई गलती का खामियाजा आज उसे धान बेचने से वंचित होकर भुगतना पड़ रहा है। यह केवल एक अकेले रैनसिंग की कहानी नहीं, अपितु महासमुंद जिला सहित प्रदेश के हजारों किसानों की व्यथा हैं, जो आज भाजपा की साय सरकार के किसान विरोधी नीतियों के शिकार हो रहे हैं।
श्री चंद्राकर ने कहा कि महासमुंद जिले में लक्ष्य के अनुरूप धान की खरीदी आधी भी नहीं हो पाई है। पंजीकृत किसानों में से अाधे किसान धान नहीं बेच पाए हैं। उपर से जिले के हजारों किसान ऐसे हैं, जिन्होंने पूर्व के वर्षों में सुगमता पूर्वक धान बेचा, लेकिन इस बार शासन द्वारा लादे गए अनावश्यक नियमों में वे फँस चुके हैं। खेत का संपूर्ण दस्तावेज होने के बाद भी किसान का कहीं पंजीयन नहीं हो पा रहा है। वहीं, पंजीयन होने के बाद प्रशासनिक लापरवाही से हुई त्रुटियों से वे परेशान हैं। बार-बार जिला कार्यालय, संबंधित क्षेत्र का तहसील दफ्तर, पटवारी, सहित सोसायटियों के चक्कर लगाने विवश हो रहे हैं। पात्रता होते हुए भी धान नहीं बेच पाने से परेशान किसान द्वारा आत्मदाह की चेतावनी सरकार की विफलता को दर्शाता है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि असल मायने में यह सरकार किसानों से धान खरीदना ही नहीं चाहती। साय सरकार की नई नीति से यही स्पष्ट हो रहा है। चंद्राकर ने कहा कि इस बार जिले में 12 लाख 45 हजार मीटि्रक टन धान खरीदने का लक्ष्य है। इसके लिए जिले में 1 लाख 62 हजार किसान पंजीकृत हैं। लेकिन, अभी तक आधे किसानों से भी धान की खरीदी नहीं हो पाई है। जबकि, धान खरीदी का समय अब केवल 18 दिन ही शेष रह गया है। ऐसे में सरकार द्वारा खरीदी लिमिट बढ़ाने तथा उठाव कराने में रूचि नहीं लिया जा रहा। जिससे यह सिद्ध हो रहा है कि सरकार हजारों किसानों को धान बेचने से वंचित करने की साजिश रच रही है। वर्तमान में जिस रफ्तार से धान खरीदी हो रही है, उसमें लक्ष्य प्राप्त करना असंभव लग रहा है। समितियों को भी निर्देश है कि तय लिमिट से अधिक धान नहीं खरीदना है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के समय बनाई गई धान खरीदी नीति को भाजपा ने बदल दिया। कांग्रेस ने 72 घंटे में धान उठाव की नीति बनाई थी। पहले इस प्रावधान के होने से समितियों के पास यह अधिकार होता था कि वे समय सीमा में उठाव न होने पर चुनौती दे सकें। अब जो बदलाव हुआ है, उसके बाद बफ़र स्टॉक के उठाव की कोई सीमा ही नहीं है। धान खरीद केन्द्रों में जगह की कमी आ रही है। चहुँओर धान खरीदी प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न कर सरकार किसानों को हतोत्साहित करने का प्रयास कर रही है।

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