महासमुंद - छत्तीसगढ़ में लाल आतंक पर विराम लगे तथा बिहड़ में सक्रिय हर नक्सली मुख्य धारा में लाैटे यह प्रदेश का हर नागरिक चाहता है। पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में भी नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने एक विशेष नीति के तहत सरकार ने काम किया। भूपेश सरकार की नीति से प्रभावित होकर कांग्रेस शासन के प्रथम वर्ष के कार्यकाल में ही सैकड़ों नक्सलियों ने आत्मसर्पण किया था। तब अबूझमाड़ के लोगों में अपनी जल, जंगल, जमीन को लेकर कोई चिंता नहीं थी। लेकिन, वर्तमान में भाजपा के साय सरकार में नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण किया जा रहा है, इसके बाद लगातार सोशल मीडिया प्लेटफार्म में अबूझमाड़ियों द्वारा अपनी जल, जंगल, जमीन को लेकर जो संवेदनाएं प्रकट की जा रही है, इस पर सभी छत्तीसगढ़ियों को विचार करना होगा। जंगलों में रहने वाले आदिवासियों को अब डर सताने लगा है कि उनकी प्राकृतिक पूजा स्थल, जंगलों को अब नष्ट किया जाएगा। जिस तरह हरे-भरे हसदेव अरण्य के लाखों पेड़ों की बलि अडाणी को लाभ पहुँचाने के लिए दी जा रही है, उसी तरह कहीं सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा के वन क्षेत्रों का बलि ना दे दी जाए।
उक्त वक्तव्य पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने सरकार द्वारा कुछ दिन पूर्व ही एक बार फिर हसदेव अरण्य के भीतरी क्षेत्र के घने जंगल में आच्छादित लाखों पेड़ों की कटाई का अनुमति अडानी कंपनी को देने के निर्णय पर व्यक्त की है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि मोदी मित्र अडानी के मुनाफे के लिए सरगुजा रेंज के केते एक्सटेंशन के खुदाई की अनुमति गौतम अडानी को भाजपा की साय सरकार ने दी है। इसके साथ ही अब रामगढ़ की पहाड़ियां, प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई, प्रभु श्री राम के वन गमन पथ की पुण्य स्मृतियों को अडानी के आर्थिक लाभ के लिए संकट में डाला जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने की सिफारिश कर दी है। राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद यह प्रस्ताव अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास भेजा गया है। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही 5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हो जाएगा। यह वही इलाका है जिसे मध्य भारत का फेफड़ा कहा जाता है। श्री चंद्राकर ने कहा कि पूरा देश जानता है कि जहां-जहां भाजपा की सरकार बनती है, वहाँ के प्राकृतिक धरोहरों को निस्तोनाबूत किया जाता है। विगत 20 वर्ष से ओड़िशा में बीजद की सरकार थी, लेकिन वहाँ कभी गंधमर्दन पर्वत के आसपास खोदाई के लिए अनुमति नहीं दी गई। लेकिन, जैसे ही ओड़िशा में भाजपा की सरकार बनी, वहाँ गंधमर्दन पर्वत के आसपास के जमीनों की खरीदी-बिक्री अडानी कंपनी द्वारा शुरू कर दिया गया, इसका प्रमुख कारण है, गंधमर्दन पर्वत के नीचे दफन बेशकीमती बाॅक्साइट। बाॅक्साइट उत्खनन के लिए त्रेतायुग के पुण्य स्मृतियों से जुड़ी गंधमर्दन के विनाश की रणनीति बनाने में भाजपा ने परहेज नहीं किया। ओड़िशा के लोग इस पर्वत को भगवान बजरंग बली का आशीर्वाद मानते हैं, लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी लाने द्रोणागिरी पर्वत को उठाकर लाते समय पर्वत का एक टुकड़ा यहां गिरा था, जिसे गंधमर्दन के नाम से ओड़िशा के लोग जानते हैं। इस पर्वत पर हजारों प्रकार के आयुर्वेदिक आैषधि पाए जाते हैं तथा सैकड़ों वन्य जीव निवास करते हैं। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ के राम वनगमन पथ के जंगलों को साफ करने की नीति भी भाजपा ने बना लिया है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि भाजपा की नक्सल उन्मूलन की नीति केवल बीहड़ क्षेत्रों, अबूझमाड़ के जंगलों के सफाया के लिए बनी है। ना कि, बीहड़ क्षेत्र के विकास के लिए। वर्तमान में अबूझमाड़ के गांवों को खाली कराया जा रहा है, इस क्षेत्र में माइनिंग का कार्य शुरू किए जाने की चर्चा है। यदि यह सत्य है तो अत्यंत चिंतनीय है, छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को उनकी माटी से अलग किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन तक 42 प्रतिशत वन क्षेत्र था।वर्तमान में भाजपा के दो साल के कार्यकाल में ही वन क्षेत्रों में लगातार माइनिंग के लिए जंगलों की कटाई की जा रही है। कहीं ऐसा न हो कि भाजपा के शेष 3 वर्ष में छत्तीसगढ़ के घने जंगलों का नामों निशान मिटा दिया जाए। श्री चंद्राकर ने समस्त प्रदेश वासियों से अपील की है कि सरकार के इस तानाशाही पूर्ण कार्रवाई का विरोध करते हुए छत्तीसगढ़ की पारंपरिक अस्मिता, जैव विविधता की रक्षा के लिए आवाज उठाएं। अन्यथा छत्तीसगढ़ को रेगिस्तान बनने में देर नहीं लगेगी। श्री चंद्राकर ने कहा कि यदि भाजपा की सरकार सच में आदिवासियों का हित चाहती है तो तत्काल पेसा एक्ट लागू कर जंगलों को कटाई पर रोक लगाएं तथा यह आवश्यक करें कि कहीं भी जंगलों की कटाई ग्राम सभा के प्रस्ताव के बिना ना होने पाए। साथ ही अबूझमाड़ के निवासियों को विश्वास दिलाना होगा कि उनके जल, जंगल, जमीन सुरक्षित रहेंगे। तथा विकास की किरण उनके गाँवों तक पहुँचेगी .

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